मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

नए जमाने का भामाशाह!

एक सपना आदमी अपने लिए देखता है लेकिन दूसरे में वह भविष्य को देखता है।अपने लिए हर कोई सपना देखता है लेकिन सन्त लोग समाज और सृष्टि के लिए स्वप्न देखा करते हैं।शामली और आसपास के क्षेत्र में महिला शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है।खासकर शामली-मुज़फ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगों (2013) के बाद यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
अभिभावक अपनी बेटियों को घर से दूर शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजने से कतराते है।वे बेटिओं और बेटों में भेदभाव तो नही करते है लेकिन सामाजिक गरिमा को लेकर काफी संजीदा है।यहाँ की बेटियों को उचित वातावरण मिले तो वे आकाश की बुलंदियों को छूने का दम रखती हैं।कुछ साथियों के साथ मिलकर हमने इस पुनीत कार्य को करने का बीड़ा उठाया और महिला डिग्री कॉलेज के लिए स्थान की तलाश करने लगे।इसी बीच हथछोया के ही निवासी और मेरे बचपन के मित्र, श्री राकेश पुत्र श्री कश्मीर सिंह से हमने बात की।श्री राकेश अविवाहित है और अपनी बुजुर्ग माँ के साथ गांव में रहते है।
राकेश ने इस सपने से खुद को बहुत गहरे तक जोड़ लिया और अपनी सम्पूर्ण भूमि जो कि लगभग 12.5 बीघा है,कालेज के लिए दान देने का प्रस्ताव यह कहते हुए रखा कि "मेरी शादी नही हुई है और न ही मेरे बच्चे हैं।मेरे लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि मुझे कालेज में पढ़ने वाली हजारो बेटियों का प्यार और सम्मान मिलेगा!" 3 अक्टूबर 2016 को राकेश ने यह समस्त भूमि कालेज को रजिस्ट्रार कैराना के समक्ष उपस्थित होकर दान कर दी। राकेश का कद हमारी नजरों में भामाशाह के समान ऊँचे उठ गया।लोग एक एक इंच भूमि पर हत्या तक कर बैठते है वह भी अपने सगों की।मेरी नजरो में राकेश का कद दानवीर कर्ण से भी कहीं ऊँचा है।कर्ण तो राजा था,सक्षम था लेकिन राकेश तो एक जमींन का आदमी है।इस मायने में राकेश का कद कर्ण से कहीं बड़ा है।राकेेेश के इस महान त्याग को भी कुछ असामाजिक तत्व हजम नही कर पाए और उन्होंने राकेश के एक रिश्तेदार को फुसला कर ट्रस्ट के विरुद्ध आई पी सी की धारा 420 आदि में धारा156(3) का दुरूपयोग करके मुकदमा दर्ज करवा दिया।इसके बावजूद भी कोई राकेश के हिमालय से बुलन्द इरादों का बदलने में कामयाब नही हो सका।राकेश आने इरादों पर अडिग हैं।अनेक लोगों ने राकेश के अदम्य साहस एवं बलिदान की प्रशंसा भी की है और उनके कालेज निर्माण के सपने से उन्होंने भी खुद को जोड़ लिया।इन लोगों ने बालिका डिग्री कालेज निर्माण के राकेश के दृढ़ निश्चय को और अधिक मजबूती देने के लिए ट्रस्ट को स्वेच्छा से भवन निर्माण हेतू दान दिया है। राकेश उस उम्मीद की आखरी किरण है जो हमें आश्वस्त करती हैं कि समाज को दिशा और प्रेरणा देने वाले महापुरुष अभी जिंदा हैं।अभी समाज पट आसुरी ताकतों का एकछत्र साम्राज्य स्थापित नही हुआ है।राकेश जैसे लोगों के त्याग की कहानियां जब तक उदघाटित नही की जाएंगी तब तक समाज में निराशा का माहौल बना रह सकता है।समाज को आशावाद की फुहारों से आनंदित किया जाना जरूरी है।

हमने भी अपना उत्तरदायित्व कंधों पर लिया कि राकेश का भरण पोषण अब हमें करना है,गरिमापूर्ण,सम्मानजनक और संरक्षण,दायित्वपूर्ण भाव से।।
नए जमाने के इस भामाशाह से बहुत लोगों को प्रेरणा मिलेगी।कल जब मैं,राकेश और आप नही रहेंगे तब भी राकेश की कहानी सुनाई जाती रहेगी।क्षेत्र में जब-जब त्याग,समर्पण और दान की बात उठेगी वह राकेश की कहानी के बिना पूरी नही होगी।
#सुनीलसत्यम