पहले एक गूंगे से जबरदस्ती पावर अटॉर्नी कराई गई।उसके तुरन्त बाद ही उसके बहरे भाई जिसके नाम पावर अटॉर्नी कराइ गई थी,से उसी की पत्नी ने जमीन खरीदी जिसकी कीमत 4085000/- बैनामा में दर्ज है।
पहला सवाल
1 जब पॉवर ऑफ़ अटॉर्नी से व्यक्ति को सारे अधिकार हस्तांतरित कर दिए गए,तो ज़मीन बेचने की क्या जल्दी थी?
2-बैनामा राशि 4085000/- खरीदार सुमन कहाँ से लाई जबकि उसकी आय नगण्य है। इस राशि की आय का स्रौत क्या है?
3- फर्जी विक्रेता नबाब ने यह राशि कहाँ रखी या खर्च की?
1 क्या वास्तव में ज़मीन की बिक्री की गई
भाजपा नेता ज़मीन फ्रॉड से जुड़े 10 सवाल
इस प्रकरण से जुड़े कुछ सवाल?
1- एक गूंगे व्यक्ति से जबरन पावर अटॉर्नी दूसरे भाई जो कि बहरा है के नाम,कराने का मकसद क्या था?
2- जब पावर अटॉर्नी कर ही दी गई तो बहरे को जमीन बेचने की क्या जल्दी थी? जमीन पावर अटॉर्नी के कुछ दिन बाद ही बेच दी गई।
3-क्या ज़मीन का वास्तविक बैनामा हुआ या कूट रचना से ज़मीन हड़पी गई?
4-खरीदार बहरे की स्वयं की पत्नी है,बैनामा में दर्ज राशि 4085000 रूपये वह कहाँ से लाई,इस राशि का स्रौत क्या है?
5- विक्रेता पति ने यह राशि कहाँ खर्च की,यदि नहीं तो यह राशि कहाँ पर रखी गई या किसी को दी गई?
6-गूंगे की पत्नी व् बेटी जीवित हैं,उनका उसकी भूमि में प्रथमतया हित निहित है,?
7-क्या गूंगे की पत्नी व बेटी की जानकारी के बाद यह ज़मीन बेचीं गई?
8- किन परिस्थितियों में गूंगे की पत्नी व बेटी ने घर छोड़ा या उन्हें जबरन घर से निकाला गया?
9-गत वर्ष बहरे की बेटी की हत्या की गई या उसने खुदखुशी की अथवा सामान्य परिस्थितियों में उसकी मौत हुई?
10-स्वयं की तहसील उन होते हुए भी पावर अटॉर्नी अन्य जनपद की खतौली तहसील में क्यों कराई गई?
सवाल और भी है जिनसे यह सिद्ध हो जाएगा कि एक निंदनीय षड्यंत्र, गलत मंशा के द्वारा रचित कूट रचना से ज़मीन हड़पी गईं है,न कि बेचीं गई है।वास्तव में ज़मीन की कोई बिक्री हुई ही नहीं और फर्जी तरीके से बैनामा दर्ज कराया गया।।
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