जीएसटी भारत मे आज़ादी के बाद बेहद महत्वाकांक्षी एवं आशावादी कर सुधार कानून है।इस कानून में देश की अर्थव्यवस्था को चार चांद लगाने के लिए सारी खूबियां मौजूद हैं।राज्य कर विभागों के अधिकारी 2016 के प्रारम्भ से ही जीएसटी को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों ने दिन रात मेहनत की और अपने अपने क्षेत्र में वर्तमान टिन धारक व्यापारियों के पंजीयन को पहले पैन नम्बर के साथ जोड़ा।लाखों व्यापारियों के पैन सम्बंधित आंकड़ों के एनएसडीएल के साथ सम्बद्ध करने के लिए अधिकारियों ने दिन रात मेहनत की ।आई बाल चेकिंग करके कई माह तक पैन अपडेशन का कार्य अभियान के रूप में चलाया गया।सरकारी विभागों की टैन संख्या को उनके टिन से जोड़ा गया।इस कार्य के लिए वाणिज्यकर विभाग के वाणिज्य कर अधिकारी, असिस्टेंट कमिशनर एवं डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारियों ने विशेष अभियान चलाया।इसके लिए व्यापारी के प्रतिष्ठानों पर भी अधिकारी गए ताकि कोई भी व्यापारी पैन अपडेशन से छूटे नही।अंततः अधिकारियों ने कर दिखाया। जीएसटी नेटवर्क के पास समस्त व्यापारियों का डेटा पहुंचा और सभी पंजीकृत व्यापारियों को जीएसटी के लिए माइग्रेट कराने के लिए जीएसटी नेटवर्क द्वारा पैन आधारित प्रोविजनल आईडी एवं पासवर्ड सृजित किये गए।यही प्रोविशनल आईडी व्यापारियों का जीएसटी नम्बर होना था।जीएसटी नेटवर्क द्वारा कई चरणों में अधिकारियों के कॉमर्शियल टैक्स लॉगिन पर ये प्रोविजनल आईडी एवं पासवर्ड भेजे गए।अधिकरियों द्वारा इन आईडी को जीएसटी पोर्टल पर एक्टिव एवं माइग्रेट कराने के लिए अपने अपने क्षेत्रानुसार कैम्प आयोजित किये गए,व्यारियों को पूरा सहयोग किया।अधिकरियो ने भरी दोपहरी में डोर टू डोर घूम कर भी प्रोविशनल आईडी वितरित की गई।व्यापारियों को जागरूक करने के लिए प्रचार के अनेक साधनों का अधिकरियों ने प्रयोग किया जैसे पम्पलेट,बैनर,कैम्प, यदि।उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के वाणिज्य कर विभाग के अधिकरियों ने बिना किसी बजटीय सहायता के यह कार्य अपने वेतन से खर्च करके किया गया।व्यापारियों को जीएसटी पोर्टल पर माइग्रेट करने के लिए व्यापारियों के लिए अनेक प्रशिक्षण का आयोजन भी किया गया।इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने अपने दफ्तरों में भी माइग्रेशन का कार्य न केवल निशुल्क किया वरण व्यापारियों को चाय पानी पिलाकर उनके आतिथ्य में भी कोई कमी नही छोड़ी।इसके लिए भी कोई बजटीय प्रावधान नही था।
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