सुजानखेड़ी..में बगिया

सुजानखेड़ी..में बगिया

शुक्रवार, 14 मार्च 2008

असर !

सोचता हूँ कभी-कभी॥
क्या मेरे होने का,
है कुछ मतलब भी।
मेरा होना न होना ,
क्या डालता है कहीं कुछ ,
असर भी॥?
तो समझ मे आता
है कि मुझे बहुत कुछ करना है
और जाना भी है दूर अभी...
कुछ सकारात्मक, कुछ रचनात्मक
तभी तो मेरे होने का कुछ मतलब होगा॥
तभी तो डालूँगा मै कुछ असर भी॥

कुंवर सत्यम.

कोई टिप्पणी नहीं: